सुदर्शन चक्र और हीलिंग: सूक्ष्म जगत का महा-नृत्यअक्सर हम हीलिंग को बीमारी के अंत के रूप में देखते हैं, लेकिन मेटाफिजिक्स की दृष्टि में हीलिंग का अर्थ है—अपनी निजी लय को ब्रह्मांडीय लय के साथ लयबद्ध करना। भगवान विष्णु का 'सुदर्शन चक्र' केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि उस 'कॉस्मिक डायनामिक्स' का प्रतीक है जो हमारे भीतर और बाहर समान रूप से प्रवाहित हो रहा है।सुदर्शन चक्र तंत्र और मंत्र एनर्जी वोर्टेक्स हीलिंग को समझने के लिए सूक्ष्म (Microcosm) से लेकर विराट (Macrocosm) तक की यात्रा को समझना अत्यंत आवश्यक है। 1. स्थिरता मृत्यु है, गति ही जीवन हैब्रह्मांड में कुछ भी स्थिर नहीं है। परमाणु के भीतर इलेक्ट्रॉन से लेकर आकाशगंगाओं के चक्रण तक, सब कुछ घूम रहा है। सुदर्शन चक्र इसी निरंतर गति (Constant Motion) का प्रतिनिधित्व करता है।सुदर्शन चक्र: ब्रह्मांडीय घूर्णन का शाश्वत सत्यतन्त्र और मेटा-फिजिक्स के अनुसार, यह सम्पूर्ण सृष्टि स्थिर नहीं, बल्कि सदा गतिमान है। जिसे हम 'पदार्थ' समझते हैं, वह वास्तव में ऊर्जा का एक घूमता हुआ भंवर है।2. सूक्ष्म जगत (Microcosm): परमाणु के भीतर का नृत्ययदि हम अपने शरीर और पदार्थ की गहराई में जाएं, तो सूक्ष्म स्तर पर भी सुदर्शन चक्र की शक्ति क्रियाशील है। प्रत्येक परमाणु (Atom) के भीतर इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निरंतर चक्कर लगा रहे हैं। यह कोणीय संवेग (Angular Momentum) ही पदार्थ को उसका रूप और स्थिरता प्रदान करता है। हमारे शरीर की कोशिकाओं (Cells) के भीतर भी सूक्ष्म चक्र सक्रिय हैं जो प्राण ऊर्जा का संचार करते हैं।3. मानव शरीर: षट्-चक्र और ऊर्जा का प्रवाहअध्यात्म में मानव शरीर को 'क्षुद्र ब्रह्मांड' (Microcosm) माना गया है। हमारे शरीर में स्थित सात चक्र स्वयं में घूमते हुए 'ऊर्जा के पहिए' हैं। 'चक्र' शब्द का अर्थ ही घूमना है।हमारे मूलाधार में स्थित कुण्डलिनी शक्ति भी सर्पिल (Spiral) रूप में ऊपर की ओर गति करती है, जो सुदर्शन की ऊर्ध्वगामी गति का प्रतीक है।4. वृहत जगत (Macrocosm): अंतरिक्ष में अनगिनत आकाशगंगाओं का गति वृहत जगत की सबसे बड़ी गति है। जब हम अपनी दृष्टि ब्रह्मांड की ओर उठाते हैं, तो वही सुदर्शन तत्व विशाल स्तर पर दिखाई देता है। हमारी आकाशगंगा का आकार स्वयं एक घूमते हुए चक्र (Spiral Galaxy) की तरह है। यह दर्शाता है कि सृजन और विनाश दोनों का आधार 'घूर्णन' ही है।पृथ्वी अपनी धुरी पर घूम रही है, चंद्र पृथ्वी के चारों ओर, पृथ्वी सूर्य के चारों ओर भी। पूरा सौरमंडल आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा कर रहा है।5. सुदर्शन तत्व और हीलिंग का विज्ञानजब हमारे शरीर में ऊर्जा (प्राण) का प्रवाह रुक जाता है या धीमा पड़ता है, तो वहां 'जड़ता' (Stagnation) पैदा होती है, जिसे हम रोग कहते हैं। हीलिंग विज्ञान का पहला नियम है—चक्र को फिर से घुमाना। जिस तरह सुदर्शन चक्र नकारात्मकता को काटकर व्यवस्था स्थापित करता है, हीलिंग ऊर्जा हमारे भीतर के अवरोधों को काटकर 'प्राण' के प्रवाह को पुनः सक्रिय करती है।सुदर्शन चक्र केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि 'चेतना का प्रवाह' है। समय स्वयं को दोहराता है हम इसे ही कालचक्र कहते है। ऋतुओं का बदलना और जन्म-मृत्यु का चक्र इसी दिव्य घूर्णन का हिस्सा है।Mantra Energy Vortex हीलिंग में जब ऊर्जा मंडल को बनाया जाता है, तब हम ब्रह्मांडीय लय (Cosmic Rhythm) के साथ जुड़ जाते हैं। यह घूर्णन हमारे भीतर की नकारात्मकता और अवरोधों को 'काटकर' ऊर्जा को पुनः संतुलित कर देता है।यजुर्वेद में यह कहा गया है,"यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे, यथा ब्रह्मांडे तथा पिंडे"यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे" (जैसा सूक्ष्म शरीर में है, वैसा ही विशाल ब्रह्मांड में है) के सिद्धांत पर आधारित हीलिंग विज्ञान वास्तव में कोई 'इलाज' नहीं, बल्कि पुनः संरेखण (Realignment) की एक कला है।सुदर्शन चक्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह अपनी धुरी पर संतुलित है। विज्ञान हमे सिखाता है कि चक्रवात के बीच में भी एक शांत बिंदु होता है।ब्रह्मांड में: यह धुरी 'ब्रह्म' या शून्य है।पिंड (शरीर) में: यह हमारी चेतना है।हीलिंग तब घटित होती है जब व्यक्ति अपनी बाहरी उथल-पुथल से हटकर अपने 'केंद्र' में स्थित हो जाता है। जब आप केंद्र में होते हैं, तो जीवन की गतियां आपको थकाती नहीं, बल्कि आपको शक्ति देती हैं।Mantra Energy Vortex के दिव्य ज्ञान को सीखने के लिए आप हमारी आगामी MEV Healing की वर्कशॉप से जुड़े।Join our WhatsApp Query Group https://chat.whatsapp.com/KJDxqvvfVrGBUbOgtHNQx9+916371119596विवेक अनंत प्रेमअनंत प्रज्ञा#MEVHealing #mantraenergyvortex #sudarshanchakra #shivamev #healing
23 Nov 2022
By - MR Admin
Comment
22 Nov 2022
By - MR Admin
Comment
29 Mar 2021
By - MR Admin
Comment
In Healing Insights